भारत सरकार समय-समय पर GST (Goods and Services Tax) की दरों में बदलाव करती रहती है ताकि जनता को राहत दी जा सके और अर्थव्यवस्था को संतुलित रखा जा सके। हाल ही में जारी हुआ New GST Rate Chart 2025 काफी चर्चा में है क्योंकि इसमें कई रोज़मर्रा की वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स की दरें बदली गई हैं।
✅ नया GST Rate Chart 2025 में क्या है खास?
इस बार सरकार ने कुछ आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स घटाया है, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी। वहीं कुछ लग्ज़री आइटम्स और सेवाओं पर टैक्स बढ़ाया गया है।
- 0% GST Slab – दूध, ब्रेड, ताज़ी सब्ज़ियां और अनाज जैसी आवश्यक वस्तुएं।
- 5% GST Slab – पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स, मसाले, दवाइयाँ और कुछ ट्रांसपोर्ट सेवाएं।
- 12% GST Slab – मोबाइल फोन, रेडीमेड कपड़े, प्रोसेस्ड फूड आदि।
- 18% GST Slab – इलेक्ट्रॉनिक सामान, होम अप्लायंसेज़, ब्यूटी प्रोडक्ट्स।
- 28% GST Slab – लग्ज़री कार, ज्वेलरी, पेंट, कोल्ड ड्रिंक्स और तंबाकू उत्पाद।
✅ किसे होगा फायदा?
- आम जनता को ज़रूरी वस्तुओं पर टैक्स कम होने से राहत मिलेगी।
- छोटे व्यवसायियों को भी कम GST स्लैब का लाभ मिलेगा।
- किसानों और मध्यम वर्ग को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी से फायदा होगा।
✅ किसे देना होगा ज्यादा टैक्स?
- लग्ज़री प्रोडक्ट्स खरीदने वालों को ज्यादा GST देना होगा।
- होटल, एयरलाइन और ज्वेलरी जैसी हाई-एंड सेवाओं पर भी टैक्स बढ़ाया गया है।
✅ क्यों किया गया बदलाव?
सरकार का कहना है कि महंगाई को संतुलित करने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए GST Rate Revision जरूरी था।
📌 FAQs
Q1. नया GST Rate Chart कब से लागू होगा?
👉 नया GST Rate Chart 1 सितंबर 2025 से लागू होगा।
Q2. किन वस्तुओं पर टैक्स कम किया गया है?
👉 दूध, ब्रेड, ताज़ी सब्ज़ियां, पैक्ड फूड और दवाइयों पर टैक्स कम किया गया है।
Q3. किन वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाया गया है?
👉 लग्ज़री कार, कोल्ड ड्रिंक, पेंट, तंबाकू और ज्वेलरी पर टैक्स बढ़ाया गया है।
Q4. क्या मोबाइल फोन पर GST बदला गया है?
👉 हाँ, मोबाइल फोन पर GST अब 12% स्लैब में रखा गया है।
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“New GST Rate Chart 2025 जारी: 0%, 5%, 12%, 18% और 28% GST स्लैब में बड़ा बदलाव। जानें किस चीज पर टैक्स कम हुआ और किस पर ज्यादा। पूरी लिस्ट देखें।”
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यहाँ 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाले “नए GST रेट चार्ट” को आसान, स्टेप-बाय-स्टेप तरीके से समझाया गया है:
1) नया स्ट्रक्चर क्या है?
GST काउंसिल ने स्लैब्स को सरल बनाकर दो मुख्य दरें कर दी हैं—5% और 18%. इसके अलावा चुनिंदा लग्ज़री/“सिन” गुड्स और कुछ बड़े वाहनों पर एक स्पेशल रेट 40% रखा गया है (अब अलग से सेस नहीं लगेगा). ये बदलाव 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होंगे।
2) 5% स्लैब—किस पर? (रोज़मर्रा की चीज़ें सस्ती)
कई डेली-यूज़ आइटम्स 5% में आए हैं, जैसे टूथपेस्ट, टूथब्रश और डेंटल फ्लॉस, टॉयलेट सोप (बार), साइकिल और उसके पार्ट्स, और रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट. मकसद आम उपभोक्ताओं का मासिक खर्च कम करना और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
3) 18% स्लैब—अब “जनरल रेट”
अधिकांश गुड्स व सर्विसेज़ पर 18% लगेगा। बड़े बदलावों में—एयर कंडीशनर और डिशवॉशर 28% से घटकर 18%, टीवी/मॉनिटर्स (सभी साइज) अब 18% पर यूनिफॉर्म, और लिथियम-आयन सहित सभी बैटरियाँ (HS 8507) 18% पर आ गई हैं। बिज़नस-टू-बिज़नस सप्लाई के लिए यह एक साफ़ “डिफ़ॉल्ट” रेट माना जा सकता है।
4) 40% स्पेशल रेट—कहाँ लागू?
मिड-साइज़/बड़े कार मॉडल्स, उच्च-इंजन क्षमता वाले SUV/MUV/MPV, और 350cc से ऊपर की मोटरसाइकिलें अब 40% पर आएँगी (पहले 28%+सेस का कुल बोझ 45–50% तक जाता था; अब सेस मर्ज होकर एक ही दर हो गई). चुनिंदा “सिन-गुड्स” (जैसे तंबाकू उत्पाद आदि) भी इसी स्पेशल ब्रैकेट में आते हैं।
5) कौन-सी चीज़ें और सेवाएँ “शून्य/मुक्त” हुईं?
व्यक्तिगत लाइफ इंश्योरेंस (टर्म/ULIP/एंडोमेंट) और व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस (फैमिली फ़्लोटर/सीनियर-सिटीजन सहित) तथा इनके री-इंश्योरेंस को GST-मुक्त किया गया है—इससे प्रीमियम प्रभावी रूप से सस्ते पड़ेंगे।
6) वाहनों पर क्या बदला?
छोटी कारें (पेट्रोल/LPG/CNG: ≤1200cc और ≤4000mm; डीज़ल: ≤1500cc और ≤4000mm) अब 18% पर हैं। थ्री-व्हीलर (HS 8703) और बसें/10+ सीट वाले वाहन (HS 8702) भी 18% पर आ गए हैं। यह ऑटो सेक्टर में डिमांड को सपोर्ट कर सकता है।
7) EV और अन्य अहम पॉइंट्स
नीतिगत संकेतों के अनुसार इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर सपोर्ट जारी है (कम दरें बरक़रार रहने का इशारा), जबकि कोयला पर सेस मर्जिंग के कारण प्रभावी टैक्स स्ट्रक्चर बदला है पर कुल बोझ broadly यथावत रखने की बात कही गई है।
8) कब से लागू? (इम्प्लिमेंटेशन टाइमलाइन)
काउंसिल के मुताबिक दर-बदल की प्रभावी तिथि 22 सितंबर 2025 है। प्रेस नोट्स/FAQ में ट्रांज़िशन का स्पष्ट ज़िक्र है—उदाहरण: अगर कोई आउटवर्ड सप्लाई नई दर से मुक्त हो जाती है तो उस तारीख़ के बाद की सप्लाई पर पहले से पड़ा ITC रिवर्स करना पड़ सकता है; इ-वे बिल्स को ट्रांज़िट में दोबारा जनरेट करने की ज़रूरत नहीं।
9) आपके लिए “स्टेप-बाय-स्टेप” एक्शन-लिस्ट (ट्रेडर/एकाउंटेंट):
रेट-मास्टर अपडेट करें: ERP/POS/GST-सॉफ़्टवेयर में नई 5%/18%/40% मैपिंग डालें।
इनवॉइसिंग बाय सप्लाई-डेट: 22 सितंबर के बाद की सप्लाई पर नई दर ही लगाएँ (ऑर्डर/डिस्पैच/डिलिवरी में “टाइम-ऑफ़-सप्लाई” देखें)।
ITC रीकॉन्साइल: जो आउटवर्ड सप्लाई “एग्ज़ेम्प्ट” हो गई, उस पर संबंधित ITC रिवर्सल के नियम लागू करें; इनवर्टेड ड्यूटी के रिफंड नियम पुराने सर्कुलर के अनुसार देखें।
प्राइस-रीलिस्टिंग: MRP/प्राइस-कार्ड/वेबसाइट अपडेट करें; कस्टमर कम्युनिकेशन तैयार रखें।
नोटिफिकेशन्स पर नज़र: अंतिम दर-नोटिफिकेशन/HSN-विशिष्ट स्पष्टीकरण CBIC/PIB पर आते ही फाइन-ट्यूनिंग करें।
संक्षेप में: अब “ज़्यादातर चीज़ें 18%”, “दैनिक ज़रूरतें 5%”, और “चुनिंदा लग्ज़री/सिन गुड्स 40%”—इसका मकसद टैक्स ढाँचे को सरल करना, रोज़मर्रा की महँगाई कम करना और त्योहारी मांग को सहारा देना है।